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Date of publication : 27/12/2018 7:24
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हज़रत नरजिस अ.स. एक मिसाली ख़ातून

हज़रत नरजिस ख़ातून अ.स. इमाम अली नक़ी अ.स. के पास थीं, इमाम अ.स. ने आपसे फ़रमाया, मैं आपका सम्मान करना चाहता हूं और आपको सम्मानित करने के लिए एक तोहफ़ा देना चाहता हूं, आप किस चीज़ को चुनेंगी दस हज़ार दिरहम या हमेशा बाक़ी रहने वाली इज़्ज़त और शराफ़त? आपने जवाब में कहा मैं हमेशा रहने वाली इज़्ज़त और शराफ़त को चुनती हूं, इमाम अ.स. ने फ़रमाया, मैं आपको ऐसे बेटे की बशारत देता हूं जिसकी हुकूमत पूरी दुनिया पर क़ायम होगी और वह इस ज़मीन को अद्ल और इंसाफ़ से भर देगा।
विलायत पोर्टल : अल्लाह ने इंसानियत की रहनुमाई और हिदायत के लिए अनेक हस्तियों को इस दुनिया में भेजा ताकि वह इंसान को अल्लाह के दीन की तालीम दें जिसके नतीजे में लोग इंसानियत की मेराज तक पहुंच सकें, अल्लाह ने इन हस्तियों में से कुछ को लोगों का आइडियल क़रार दिया है, (सूरए अहज़ाब, आयत 21, सूरए मुमतहेना, आयत 6)
और कुछ रिवायतों में भी इस तरह की कुछ हस्तियों का ज़िक्र हुआ है, (बिहारुल अनवार, जिल्द 53, पेज 178)
इन हस्तियों और शख़्सियतों में कुछ ख़ातून भी हैं, जिन्हें मिसाली ख़ातून के तौर पेश किया गया है, जिनमें से हज़रत मरयम बिन्ते इमरान और हज़रत आसिया बिन्ते मुज़ाहम का ज़िक्र अल्लाह की किताब क़ुर्आन में मौजूद है। (सूरए तहरीम, आयत 12)
इन्हीं मिसाली और आइडियल ख़ातून में से एक हज़रत नरजिस ख़ातून अ.स., हज़रत इमाम महदी अ.स. की मां हैं, इतिहासकारों ने आपके कई नाम ज़िक्र किए हैं, जिनमें से नरजिस, सौसन, हदीसा, मलीका और रेहाना वग़ैरह हैं। (कमालुद दीन व तमामुन नेमह, जिल्द 2, पेज 432)
रिवायतों और ऐतिहासिक तथ्यों ने इस बात को साफ़ शब्दों में बयान किया है कि जनाब नरजिस ख़ातून अ.स. का हसब और नसब रूम की बड़ी शख़्सियतों से मिलता है, आप यशूआ की बेटी हैं जिनका हसब और नसब रूम के बादशाह क़ैसरे रूम से मिलता है और इसी तरह आपकी वालिदा का शजरा हज़रत शमऊन जो कि हज़रत ईसा के हवारियों में से थे उनसे मिलता है। (दानिश नाम-ए-इमाम महदी अ.स., मोहम्मद मोहम्मदी रय शहरी, जिल्द 2, पेज 179)
यहां एक बात का ज़िक्र कर देना ज़रूरी है कि आप एक पाक और शरीफ़ घराने से रिश्ता रखती हैं, लेकिन मुसलमानों की रूमियों के साथ जंग में आपको कनीज़ बना कर बग़दाद लाया गया जहां आपको कनीज़ के तौर पर बेच दिया गया, इसी वजह से किताबों में आपके लिए कनीज़ का शब्द इस्तेमाल किया गया है, लेकिन हक़ीक़त में आप रूम की शहज़ादी थीं, इमाम ज़माना अ.स. की तारीफ़ में इस्तेमाल होने वाले शब्दों में इब्नो ख़ियरतिल अमा यानी बेहतरीन कनीज़ के बेटे (अल-काफ़ी, अल्लमा कुलैनी र.ह., जिल्द 1, पेज 322, अल-इरशाद, शैख़ मुफ़ीद र.ह., जिल्द 2, पेज 275, आलामुल वरा, अल्लामा तबरिसी र.ह., जिल्द 2, पेज 92) या इब्नो सय्येदतिल अमा यानी सैयद और सरदार कनीज़ के बेटे (कमालुद दीन व तमामुन नेमह, शैख़ सदूक़ र.ह., जिल्द 2, पेज 345) ज़िक्र हुआ है,
रिवायतों में मौजूद है कि किस तरह आपने ख़्वाब में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. और हज़रत मरयम स.अ. को देखा और उनकी ख़्वाहिश पर आपने ख़ुद को मुसलमानों की कनीज़ी में क़रार दिया, और हज़रत इमाम अली नक़ी अ.स. ने अपने सफ़ीर द्वारा आपको ख़रीद कर अपने बेटे इमाम हसन असकरी अ.स. से आपकी शादी कर दी। (कमालुद दीन व तमामुन नेमह, शैख़ सदूक़ र.ह., जिल्द 2, पेज 417)
आपकी कुछ विशेषताओं को संक्षेप में बयान कर रहे हैं जो आज के समाज की औरतों के लिए आइडियल हैं।
बेहतरीन ख़ानदान
जैसाकि पहले ज़िक्र हुआ कि आपका संबंध रूम के शाही घराने से था और आप रूम की शहज़ादी थीं, लेकिन मसलेहत की ख़ातिर आपने कनीज़ बन कर इस्लाम को क़ुबूल किया, आपके दादा रूम के बादशाह थे और वालिद यशूआ थे जिनमें शाही ख़ानदान की सारी ख़ूबियां जैसे बहादुरी और सख़ावत वग़ैरह पाई जाती थीं और आपकी वालिदा भी एक ऊंचे ख़ानदान से थीं जिनका हसब और नसब हज़रत ईसा अ.स. के हवारी जनाब शमऊन से मिलता है, इस हिसाब से इस ख़ानदान की पाकीज़गी, पाकदामनी, हया विशेष सिफ़त थी।
ज़माना अ.स. इस बारे में फ़रमाते हैं कि ऐ लोगों जान लो कि अगर कोई हज़रत ईसा अ.स. और जनाब शमऊन को देखना चाहता है तो बेशक मैं ईसा और शमऊन हूं (बिहारुल अनवार, जिल्द 53, पेज 9) इमाम अ.स. का मक़सद इस जुमले द्वारा अपने ननिहाली ख़ानदान की अज़मत और बुलंदी को बयान करना था।
पाकदामनी
हालांकि आप एक शाही घराने में ज़िंदगी गुज़ार रही थीं लेकिन आपने ख़ुद को पाकदामनी और पाकीज़गी के ज़ेवर से सजाया, आपकी ज़िंदगी में ऐसी ही पाकीज़गी और पाकदामनी पाई जाती है जैसी हज़रत मरयम अ.स. हज़रत ईसा अ.स. और जनाब शमऊन की ज़िंदगी में थी, आपकी ख़्वाहिश थी कि मेरी शादी ऐसे घराने में हो जिसका बातिन पाक होने के साथ साथ वह तौहीद परस्त भी हो, अल्लाह ने आपकी इस ख़्वाहिश को एक मोजिज़े की शक्ल में पूरा किया, और आपको अहलेबैत अ.स. के घराने में मासूम इमाम अ.स. की बीवी बनने का शरफ़ दिया और यह सब आपकी पाकदामनी, पाकीज़गी और मानवियत का नतीजा था। (हज़रत महदी अ.स. फ़रोग़े ताबाने विलायत, मोहम्मद मोहम्मदी इश्तेहारदी, पेज 22)
अहलेबैत अ.स. का सम्मान
आपकी सिफ़ात में से एक सिफ़त आपका बा अदब होना है, जब आप सामर्रा पहुंचीं तो इमाम अली नक़ी अ.स. ने आपसे फ़रमाया अल्लाह ने कैसे आपको इस्लाम की फ़ज़ीलत दिखाई और पैग़म्बर स.अ. और उनकी पाकीज़ा आल अ.स. से किस तरह मिलवाया? तो आपने बहुत ही सम्मान के साथ कहा कि ऐ पैग़म्बर स.अ. के बेटे मैं कैसे आपको बताऊं, क्योंकि आप मुझसे बेहतर जानते हैं और मुझसे बेहतर इस बात का इल्म रखते हैं। (आयानुश-शीया, अल्लामा सैयद मोहसिन अमीन आमुली, पेज 35)
जनाब हकीमा ख़ातून कहती हैं कि इमाम ज़माना अ.स. की विलादत की रात, इमाम हसन असकरी अ.स. के हुक्म पर अमल करते हुए मैं उनके घर रुक गई, जब मैंने नरजिस ख़ातून को देखा तो विलादत होने के कुछ आसार नहीं दिखाई दिए लेकिन इमाम हसन असकरी अ.स. की बातों से मुझे आराम मिल गया फिर मैं नरजिस ख़ातून के क़रीब आई और उनसे उनकी तबियत और हाल पूछा कि ऐ अज़ीम ख़ातून आज आप कैसा महसूस कर रहीं हैं, तो उन्होंने कहा अज़ीम और तारीफ़ के क़ाबिल तो आप हैं क्योंकि आप हमारे ख़ानदान की बुज़ुर्ग हस्ती हैं। (आयानुश-शीया, अल्लामा सैयद मोहसिन अमीन आमुली, पेज 39-40)
आपका जनाब हकीमा ख़ातून से इत तरह बात करना इस बात को साबित कर देता है कि आप पैग़म्बर स.अ. के ख़ानदान से बेहद मोहब्बत करती थीं।
बसीरत और मारेफ़त
आपकी एक और अहम विशेषता आपके पास बसीरत और मारेफ़त का होना है, हज़रत नरजिस ख़ातून अ.स. इमाम अली नक़ी अ.स. के पास थीं, इमाम अ.स. ने आपसे फ़रमाया, मैं आपका सम्मान करना चाहता हूं और आपको सम्मानित करने के लिए एक तोहफ़ा देना चाहता हूं, आप किस चीज़ को चुनेंगी दस हज़ार दिरहम या हमेशा बाक़ी रहने वाली इज़्ज़त और शराफ़त? आपने जवाब में कहा मैं हमेशा रहने वाली इज़्ज़त और शराफ़त को चुनती हूं, इमाम अ.स. ने फ़रमाया, मैं आपको ऐसे बेटे की बशारत देता हूं जिसकी हुकूमत पूरी दुनिया पर क़ायम होगी और वह इस ज़मीन को अद्ल और इंसाफ़ से भर देगा। (आख़रीन सफ़ीर, सैयद जमालुद्दीन हेजाज़ी, पेज 28)
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