Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 197545
Date of publication : 29/1/2019 15:13
Hit : 148

कमियां तलाश करने वाले

क़ुर्आन की आयतों और मासूमीन अ.स. की हदीसों की रौशनी में लोगों की कमियों की तलाश में रहना ऐसी मनहूस सिफ़त है जो इंसान को दाग़दार और नापाक कर देती है और उसकी अख़लाक़ी शख़्सियत को गिरा देती है।
विलायत पोर्टल : कुछ लोगों में एक बहुत मनहूस आदत यह होती है कि वह हमेशा दूसरों की कमियों और ग़लतियों की तलाश में रहा करते हैं ताकि उनकी कमियों को देख कर उनकी खिचाई कर सकें उनका मज़ाक़ उड़ा सकें उन्हें अपमानित कर सकें, हालांकि ऐसे लोगों के अंदर ख़ुद इतनी कमियां और ख़ामियां पाई जाती हैं कि अगर उन कमियों और ख़ामियों की तादाद को देखा जाए तो उनकी अच्छाईयों से ज़्यादा निकल जाती हैं, फिर भी यह लोग अपनी कमियों और ग़लतियों से ग़ाफ़िल हो कर दूसरों की कमियों के पीछे भागा करते हैं, याद रखिए क़ुर्आन की आयतों और मासूमीन अ.स. की हदीसों की रौशनी में लोगों की कमियों की तलाश में रहना ऐसी मनहूस सिफ़त है जो इंसान को दाग़दार और नापाक कर देती है और उसकी अख़लाक़ी शख़्सियत को गिरा देती है।
जो चीज़ इंसान को दूसरों की कमियां निकालने पर उभारती है वह एहसासे कमतरी यानी ख़ुद को सामने वाले से कम आंकना, घमंड, तकब्बुर और एहसासे बरतरी यानी ख़ुद को सामने वाले से बड़ा समझना वग़ैरह  है, इसी बुरी आदत की वजह से इंसान के अख़लाक़ और उसकी रूहानियत में जो बदलाव पैदा होते हैं वह इंसान को बहुत ग़लत और ग़ैर माक़ूल ग़लतियां करने का हौसला देते हैं।
कमियां निकालने वाले अपनी फ़िक्र का इस तरह इस्तेमाल करते हैं जो किसी भी तरह अक़्ल और शरीयत के नज़दीक पसंदीदा नहीं है, क्योंकि यह लोग अपने जान पहचान के लोगों या दोस्तों के आमाल की जासूसी करते हैं ताकि दूसरों की कोई भी कमी और ख़ामी उनके हाथ लग जाए तो उसी को लेकर ले उड़ें और दोस्तों  की निंदा और उनकी कमियों पर चर्चा कर उन पर कीचड़ उछालें और उन्हें बदनाम करें, और जितना मुमकिन हो दोस्तों को लोगों की निगाह में ज़लील और अपमानित करें, और चूंकि यह लोग दूसरों की कमियां तलाश करने में लगे रहते हैं इसलिए उनके पास इतना समय भी नहीं रहता कि अपनी कमियों को तलाश कर सकें और उन पर निगाह डाल सकें, और इसीलिए ऐसे लोग ज़िंदगी में हिदायत हासिल करने और अपने अंदर सुधार लाने की दौड़ में पीछे रह जाते हैं, हक़ीक़त में ऐसे लोग डरपोक होते हैं, इसलिए यह किसी तरह की पाबंदी को क़ुबूल नहीं करते और न हद में रहना जानते हैं और ना ही दूसरों की इज़्ज़त और सम्मान उनकी निगाहों में होता है, यह लोग अपने सबसे क़रीबी दोस्त के साथ भी सच्चाई और ख़ुलूस से पेश नहीं आ सकते, इसीलिए जहां यह लोग दूसरों की कमियों पर चर्चा करते हैं वहीं मौक़ा मिलते ही अपने सबसे क़रीबी दोस्त की बुराई बयान करना शुरू कर देते हैं और यही वजह है कि ऐसे लोगों को सच्चे दोस्त नहीं मिल पाते या अगर मिल भी गए तो ज़्यादा दिन दोस्ती चल नहीं पाती, यह कभी ऐसे दोस्त नहीं बना पाते जिसकी मोहब्बत और मेहेरबानी के साए में अपने जज़्बात को सुकून दे सकें, और इनके इर्द गिर्द जो लोग साथ में होते भी हैं वह इन्हीं  सिफ़ात के मालिक होते हैं।
इंसान की शराफ़त और उसकी बुज़ुर्गी ख़ुद उसके हाथ में है जो शख़्स दूसरों की शख़्सियत का ख़्याल नहीं रखेगा उसके सम्मान को पैरों तले रौंदेगा तो ज़ाहिर है उसकी शख़्सियत का भी कोई ख़्याल रखेगा और न ही इज़्ज़त का। यह हो सकता है कि कमियां ढ़ूंढ़ने वाला अपने अमल के नतीजे से ग़ाफ़िल हो लेकिन वह फिर भी अपने अमल की वजह से लोगों की बुराई से महफ़ूज़ नहीं रह सकता, क्योंकि कमियों के पीछे भागने वाले ने अपनी इस हरकत की वजह से लोगों के दिलों में हसद, नफ़रत, ईर्ष्या और घृणा का जो बीज बोया है उसके नतीजे को भुगतना तो पड़ेगा ही, और उसे अपने इस अमल के नतीजे में शर्मिंदगी के अलावा कुछ हाथ आने वाला नहीं है।
जो शख़्स लोगों के साथ ज़िंदगी गुज़ारना चाहता है और एक सामज में रहना चाहता है उसकी ज़िम्मेदारी है कि अपने फ़रीज़े पर अमल करे, लोगों की ख़ूबियों और अच्छाईयों पर निगाह रखे, उनके नेक आमाल को ध्यान में रखे, अच्छे अख़लाक़ की प्रशंसा करे, जिन आदतों या सिफ़तों से दूसरों की शख़्सियत को ठेस पहुंचती हो और जो बातें उसूल के ख़िलाफ़ हों उनसे दूरी बनाए रहे, क्योंकि मोहब्बत मोहब्बत ही के नतीजे में बाक़ी रहती है और इज़्ज़त और सम्मान दोनों तरफ़ से हो तभी वह इज़्ज़त और सम्मान बाक़ी रहता है, इसलिए जो अपने दोस्तों और लोगों की कमियों और ग़लतियों पर पर्दा डालने का आदी होगा उनके बीच मोहब्बत बाक़ी रहेगी, इसका मतलब साफ़ शब्दों में यूं समझ लीजिए कि अगर किसी दोस्त में कोई कमज़ोरी या कमी या ग़लती देखो तो उसको इधर उधर, इनसे उनसे और यहां वहां बयान करने के बजाए किसी सही और मुनासिब मौक़े पर उसका इस बात की तरफ़ अच्छे अंदाज़ से ध्यान दिलाओ।
यह बात भी ध्यान देने के क़ाबिल है कि अगर किसी दोस्त की कमी पर उसको मुतवज्जेह कराना है तो इस काम में भी बहुत महारत की ज़रूरत है, उसको इतने अच्छे अंदाज़ से बोलिए कि उसको तकलीफ़ न पहुंचे और उसके जज़्बात को ठेस न पहुंचे, अख़लाक़ के एक बहुत बड़े उस्ताद का कहना है कि तुम्हारे लिए यह मुमकिन है कि अपने दोस्त का ध्यान उसकी ग़लती की तरफ़ केवल एक इशारे से दिला दो, उससे बात करने की भी ज़रूरत नहीं है, क्योंकि अगर तुमने अपने दोस्त से यह कह दिया कि तुम्हारे अंदर यह कमी है तो किसी भी क़ीमत पर तुम उसे अपने जैसा नहीं बना सकते, क्योंकि आपने डायरेक्ट यह बात कह कर उसकी अक़्ल और फ़िक्र पर हमला किया है, उसकी शख़्सियत को ठेस पहुंचाई है, आपके इस रवैये से वह ज़िद पर अड़ जाएगा और जिसका नतीजा यह होगा कि वह अपने अमल में कोई बदलाव नहीं लाएगा, आप चाहे अफ़लातून और अरस्तू की सारी लॉजिक उस पर ख़र्च कर दें लेकिन उसका बातिनी अक़ीदा नहीं बदल पाएंगे, क्योंकि आपने उसके इगो को ठेस पहुंचाई है,
ध्यान रहे कि अगर बातचीत की नौबत आ जाए तो कभी भी बात इस तरह शुरू न करें कि मैं आपकी ग़लती साबित कर दूंगा, मेरे पास इसके लिए मज़बूत दलीलें और सबूत है, क्योंकि इस तरह की बातचीत का मतलब यह है कि आप उससे ज़्यादा अक़्लमंद हैं, लोगों की फ़िक्रों और उनके विचारों में सुधार लाना आम हालात में सख़्त हो जाता है और अगर उसके सामने बंदिशें होंगी तो बेशक सुधार ना मुमकिन की हद तक चला जाएगा, अगर किसी बात को साबित ही करना चाहते हों तो पहली बात यह है कि उस बात का किसी से और से ज़िक्र न करें और इतनी होशियारी और महारत से उसे अंजाम दीजिए कि कोई समझ ही न सके कि आपका मक़सद क्या है, इस सिलसिले में शायर की इस नसीहत पर अमल कीजिए कि लोगों को इस तरह तालीम दो कि कोई तुमको टीचर या उस्ताद न समझे। ...................


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

यह 20 अरब डॉलर नहीं शीयत को नाबूद करने की साज़िश की कड़ी है पैग़म्बर स.अ. की सीरत और इमाम ख़ुमैनी र.अ. की विचारधारा शिम्र मर गया तो क्या हुआ, नस्लें तो आज भी बाक़ी है!! इमाम ख़ुमैनी र.ह. और इस्लामी इंक़ेलाब की लोकतांत्रिक जड़ें हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के घर में आग लगाने वाले कौन थे? अहले सुन्नत की किताबों से एक बेटी ऐसी भी.... फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी स्थापित कर भारतीय छात्रों को गुमराह कर रही है अमेरिकी सरकार । वह एक मां थी... क़ुर्आन को ज़हर बता मस्जिदें बंद कराने का दम भरने वाले डच नेता ने अपनाया इस्लाम । तुर्की के सहयोग से इदलिब पहुँच रहे हैं हज़ारो आतंकी । आयतुल्लाह सीस्तानी की दो टूक , इराक की धरती को किसी भी देश के खिलाफ प्रयोग नहीं होने देंगे । ईरान विरोधी किसी भी सिस्टम का हिस्सा नहीं बनेंगे : इराक सीरिया की शांति और स्थायित्व ईरान का अहम् उद्देश्य, दमिश्क़ और तेहरान के संबंधों में और मज़बूती के इच्छुक : रूहानी आयतुल्लाह सीस्तानी से मुलाक़ात के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नजफ़ पहुंची इस्लामी इंक़ेलाब की सुरक्षा ज़रूरी , आंतरिक और बाह्र्री दुश्मन कर रहे हैं षड्यंत्र : आयतुल्लाह जन्नती