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Date of publication : 4/2/2019 17:16
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अवैध हुकूमत और बच्चों पर ज़ुल्म का अंजाम

पिछले 50 सालों में और ख़ास तौर इस्लामी बेदारी के दौरान अवैध राष्ट्र इस्राईल ने फ़िलिस्तीन के बच्चों पर ज़ुल्म और अत्याचार की सारी हदें पार कर दी है, वह बच्चे जो भविष्य में नया इतिहास रचने वाले हैं वह हर तरह के ज़ुल्म और अत्याचार को बर्दाश्त करने पर मजबूर हैं। यानी इतिहास के सारे ज़ुल्म और सारे अत्याचार, अवैध राष्ट्र इस्राईल की हैवानियत और दरिंदगी के आगे शर्मिंदा हैं

विलायत पोर्टल : इस्राईल जानता है कि कि उसकी हुकूमत और सत्ता ग़ैर क़ानूनी है और वह क़ानून का सहारा ले कर अपनी सत्ता और हुकूमत को क़ायम नहीं रख सकता है, इसलिए हमेशा से उसकी कोशिश रही है कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून को पैरों तले रौंद डाला जाए और अपने ज़ुल्म के ज़ोर पर अपना डर मिडिल ईस्ट में बरक़रार रखा जाए।
पिछले 50 सालों में और ख़ास तौर इस्लामी बेदारी के दौरान अवैध राष्ट्र इस्राईल ने फ़िलिस्तीन के बच्चों पर ज़ुल्म और अत्याचार की सारी हदें पार कर दी है, वह बच्चे जो भविष्य में नया इतिहास रचने वाले हैं वह हर तरह के ज़ुल्म और अत्याचार को बर्दाश्त करने पर मजबूर हैं।
यानी इतिहास के सारे ज़ुल्म और सारे अत्याचार, अवैध राष्ट्र इस्राईल की हैवानियत और दरिंदगी के आगे शर्मिंदा हैं, दुनिया में बहुत सारी जंगें हुईं, बहुत ख़ून बहाया गया, बहुत नुक़सान हुए, बहुत लाशें गिरीं, बहुत सारी जानें गईं लेकिन इतिहास गवाह है कि कुछ जंगों को छोड़ कर लगभग सभी में औरतों और बच्चों को लेकर हर जंग में यही कोशिश हुई कि उन्हें नुक़सान न पहुंचे, लेकिन यह अवैध राष्ट्र इस्राईल की हैवानियत और ज़ायोनी दरिंदों का वहशियाना रवैया था कि उन्होंने बच्चों, औरतों और बूढ़ों को भी निशाना बनाया, और मर्दों और जवानों की तरह उन्हें भी प्रताड़ित किया, चाहे फ़िलिस्तीन हो या लेबनान या और दूसरी हर वह जगह जहां इन ज़ायोनी दरिंदों ने क़दम रखे हैं वहां बच्चों और औरतों तक को अपने वहशी हमलों का शिकार बनाया है।
इस्राईली दरिंदे अलग अलग चालें और साज़िशें कर के बच्चों को गिरफ़्तार करते हैं, उन बच्चों का फ़िलिस्तीन के गली कूचों से अपहरण कर के उन्हें जेल में डाल देते हैं यहां तक कि घरों से बच्चों को किडनैप कर लिया जाता है, और इस्राईल हुकूमत और फ़ौज की इसी हैवानियत और दरिंदगी के चलते वह बर्बादी और विनाश की तरफ़ तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
इन दरिंदों ने माओं की गोद तक से बच्चे छीन कर जान से मार दिए हैं, माओं को रोता बिलकता छोड़ कर, उनकी गोद से उनके सहारों को छीन कर, उनके सुनहरे भविष्य की उम्मीद को उनसे छीन कर मार दिया है, ज़ाहिर है ऐसी माओं, ऐसे बे सहारा वालेदैन के मुंह से निकली आहें बर्बाद नहीं जाएंगी, यही वजह है कि आज अवैध राष्ट्र अपने पतन और विनाश की उल्टी गिनती गिन रहा है।
अवैध राष्ट्र इस्राईल की हुकूमत और फ़ौज ऐसी नीच और ग़ैर इंसानी हरकतों के लिए रणनीति तैयार करती है और बड़ी मक्कारी से ऐसी घिनौनी हरकतें करती है, उनकी इन नीच, घटिया, ग़ैर इंसानी हरकतों की एक मिसाल वहशियाना तरीक़े से फ़िलिस्तीनी बच्चों का बिना किसी जुर्म के अपहरण करना, उन्हें घरों में घुस कर किडनैप करना और उन्हें जेल में डाल देना है।
कुछ बच्चों का क़ुसूर यह होता है कि वह इन ज़ायोनी दरिंदों से अपनी नफ़रत को ज़ाहिर करते हुए इस्राईली फ़ौजी गाड़ी पर पत्थर फेंकते हैं जिसके कारण उन्हें पकड़ कर जेल में डाल दिया जाता है, ऐसे ही एक क़िस्सा सन् 1985 में हुआ जिसमें बेलाता के इलाक़े में एक बच्चे ईहाब ख़मीस मंसूर को जेल की अंधेरी कोठरी में डाल दिया गया।
कुछ बच्चों को किसी चौकी से गुज़रते हुए गिरफ़्तार किया जाता है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी जाती है, और बहाना यह बनाया जाता है कि इसकी शक्ल किसी दूसरे से मिलती है, जिसकी भी उन्हें तलाश होती है उस बच्चे का संबंध किसी ऐसे संगठन से बता देते हैं जो इस्राईल के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की जंगी मुहिम से जुड़ा होता है।
और सबसे हैरानी की बात तो यह है कि अवैध राष्ट्र इस्राईल की हैवानियत और ज़ायोनी दरिंदों की ग़ैर इंसानी हरकतों से जहां लगभग पूरी दुनिया ने अपने ग़ुस्से और नाराज़गी को ज़ाहिर किया वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ जिसका दावा दुनिया भर में अमन और शांति स्थापित करने का है वह हाथ पर हाथ रख कर तमाशा देख रहा है।
वरना एक ऐसा राष्ट्र जो अवैध क़ब्ज़ा कर के आबाद हुआ और लोगों के घरों को गिरा कर, उनकी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा कर के, उनकी जान ले कर अपने घर बनाए, जिसने न बूढ़ों पर रहम किया, न औरतों का ख़्याल किया और ना ही बच्चों की मासूमियत को समझा, उसकी नीयत और उसका इरादा केवल अपने घर आबाद करना और उसके लिए चाहे किसी को भी बर्बाद करना पड़े चाहे जितनी जान लेनी पड़े, किसी भी देश का मामला हो किसी भी जगह का मसला हो हर जगह ज़ायोनी दरिंदे मौजूद दिखाई देते हैं, कहीं पर भी हत्या हो रही हो, लूटपाट मच रही हो, घर उजड़ रहे हों, माएं सिसक रही हों, बच्चे बिलक रहे हों, बूढ़े बे सहारा हो कर खुले आसमान के नीचे पड़े हों हर जगह इसी अवैध राष्ट्र की दरिंदगी दिखाई देती है।
फ़िलिस्तीन हो या लेबनान, बहरैन हो या यमन हर जगह यही दरिंदे या इन दरिंदों की साज़िश दिखाई देती है, और यही वजह है कि इतने सारे ज़ुल्म और अत्याचार के बाद आज इस्राईल बर्बादी और विनाश की कगार पर पहुंच चुका है।
कुछ महीने पहले एक क्लिप वायरल हुई थी जहां ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का केवल नाम आते ही नेतनयाहू जैसे की भी ज़ुबान सूख जाती है और मुंह से आवाज़ नहीं निकलती और तुरंत पानी पीने की ज़रूरत पड़ जाती है।
या अभी एक हफ़्ता पहले ही की बात है जब हिज़्बुल्लाह के जनरल सेक्रेटरी सय्यद हसन नसरुल्लाह ने मज़ाक़ करते हुए ही कहा था कि हमारे नौजवान साइकिल से इस्राईल में घुस सकते हैं, उसके बाद से अगले ही दिन इस्राईल इतना भयभीत हुआ कि तुरंत उन छोटी दीवारों पर लोहे की मोटी सरिया चुनवाने लगा।
यह डर कहां से पैदा हुआ.....
यह उनके दिलों में ख़ौफ़ का जन्म कैसे हुआ.....
यह विनाश की कगार पर कैसे पहुंच गए.....
ऐसे बहुत से सवालों का यही जवाब है कि ज़ुल्म कितना ही परवान क्यों न चढ़ जाए, लेकिन मज़लूमों की चीख़ों और बे सहारा की आहों के आगे उसके ज़ुल्म की क़िले की ज़्यादा उम्र नहीं होती, इतने मासूमों का ख़ून बहा कर, इतनी माओं की मांगें उजाड़ कर, इतने बे सहारा वालेदैन को सिसकने पर मजबूर करने के बाद ज़ाहिर है इन दरिंदों को ऐसे ही क्या बल्कि इससे भी बुरे दिनों का सामना करना पड़ेगा।



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