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Date of publication : 7/2/2019 17:32
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एक बेटी ऐसी भी....

वह बेटी जिसका नाम पैग़म्बर स.अ. ने अल्लाह के हुक्म से फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) रखा था वह रिसालत के बाग़ का अकेला वह फूल है जिसकी मिसाल मिलना मुमकिन नहीं है, वह इसलिए कि अल्लाह ने मर्दों की हिदायत के लिए एक लाख चौबीस हज़ार नबियों को भेजा, नबुव्वत के बाद इमामत के सिलसिले को शुरू किया जो आज तक जारी है, लेकिन बेटियों और महिलाओं के लिए इसी बेटी यानी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. को क़यामत तक की औरतों के लिए आइडियल क़रार दिया।

विलायत पोर्टल :  वह घुटन का माहौल जिसमें ज़ुल्म और दरिंदगी चारो ओर फैली हुई थी, जिसमें इंसानियत का दूर दूर तक नाम व निशान नहीं था, जिस ज़माने के ज़मीर फ़रोश, बे ग़ैरत इंसान के भेष में दरिंदे इंसानों को ज़िंदा दफ़्न कर के उस घिनौने काम पर गर्व करते थे, जो बेटी और औरत को अपने लिए अपमान और अछूत समझते थे, यह हैवानियत का वह दौर था जिसमें चारो तरफ़ केवल अत्याचार और ज़ुल्म का अंधेरा छाया हुआ था, उसी अंधेरे को छांट कर उजाला फैलाने के लिए रिसालत के घर इस्मत की ऐसी किरन चमकी जिसकी किरनों ने पूरी दुनिया की आंखों को चकाचौंध कर रखा था, नबुव्वत के घर खिलने वाले इस गुलाब ने पूरी दुनिया को महका दिया था, अरब के उस जेहालत और घुटन के माहौल में पैग़म्बर स.अ. के घर एक बेटी ने इस दुनिया में तशरीफ़ ला कर उस जाहिल समाज को यह समझा दिया कि याद रखो बेटियां कभी बाप के लिए ज़हमत और समस्याओं का कारण नहीं होतीं बल्कि हमेशा रहमत ही का कारण होती हैं।
इस बेटी ने दुनिया में क़दम क्या रखा पूरे अरब में इंक़ेलाब सा बरपा हो गया, जिस ज़माने में बेटी के लिए उसके अपने मां बाप हत्यारे बने हुए थे इस बेटी की विलादत के बाद उसी ज़माने में मां बाप बेटियों की तमन्ना करने लगे, जिस दौर में बेटियों को बोझ समझा जाता था इस बेटी के दुनिया में क़दम रखते ही रहमत और बरकत का स्रोत समझा जाने लगा, जिस माहौल में बेटी को ख़ुद के लिए अपमान समझा जाता था इस बेटी की विलादत से उसी माहौल में बेटियों को सर का ताज समझा जाने लगा, जो समाज बेटी शब्द तक से चिढ़ता था वही समाज आज बेटी को गुलाब जैसे शब्दों से याद कर रहा था, इसका मतलब यह है कि कल तक जो समाज जेहालत के घोर अंधेरों में था इस बेटी ने दुनिया में क़दम रखते ही उसी समाज को नूरानी फ़िज़ा में सांस लेने पर मजबूर कर दिया था, और साफ़ शब्दों में इस तरह कहा जा सकता है कि यह बेटी जिसका नाम पैग़म्बर स.अ. ने अल्लाह के हुक्म से फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) रखा था वह रिसालत के बाग़ का अकेला वह फूल है जिसकी मिसाल मिलना मुमकिन नहीं है, वह इसलिए कि अल्लाह ने मर्दों की हिदायत के लिए एक लाख चौबीस हज़ार नबियों को भेजा, नबुव्वत के बाद इमामत के सिलसिले को शुरू किया जो आज तक जारी है, लेकिन बेटियों और महिलाओं के लिए इसी बेटी यानी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. को क़यामत तक की औरतों के लिए आइडियल क़रार दिया।
यही वह बेटी थी जिसने पैग़म्बर स.अ. पर लगने वाले अबतर के ताने को ऐसा दूर किया कि अल्लाह ने ख़ुद इस बेटी को सूरए कौसर में कौसर का ख़िताब दिया, यह वही सूरए कौसर है, जिसका मिस्दाक़ हज़रत ज़हरा स.अ. हैं, और इस सूरे की फ़साहत और बलाग़त के आगे अरब के बड़े बड़े अदीबों और अरबी के माहिर लोगों ने अपने सर झुका दिए।
यही वह बेटी थी कि जब अरब के जाहिलों ने बेटियों और महिलाओं की अज़मत और फ़ज़ीलत को न जानते हुए उन्हें हर तरह की विरासत से महरूम कर रखा था और नक़ली हदीसों द्वारा ख़ुराफ़ात को शुरू कर दिया था कि नबी ने फ़रमाया हम नबियों के समाज में न तो हम किसी के वारिस बनते हैं न ही किसी को वारिस बनाचे हैं, ऐसी विचारधारा और ऐसी सोंच और अक़ीदे वालों के बीच इस बेटी ने फ़िदक के मसले को ले कर हुकूमत के ख़िलाफ़ सवाल उठाए और सारे लोगों को यह समझा दिया कि इस्लाम ने औरत को विरासत से महरूम नहीं रखा, यही नहीं बल्कि इस्लाम ने बेटियों और महिलाओं के अधिकार बताएं हैं और औरतों के हुक़ूक़ पर विशेष ध्यान दिया है, क्योंकि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. ने पैग़म्बर स.अ. की सच्ची और मुबारक ज़बान से ख़ुद सुना था कि ऐ मेरी बेटी फ़ातिमा (स.अ.) मुझे अल्लाह ने हुक्म दिया है कि मैं फ़िदक तुम्हारे नाम कर दूं, अब दुनिया चाहे विरासत को लेकर कितनी ही हदीसों गढ़ ले और नक़ली हदीसें छाप ले लेकिन एक बेटी और एक सिद्दीक़ा की ज़बान से निकली हुई यह बात जिसकी सच्चाई पर क़ुर्आन की दलील भी मौजूद है उसकी बात के आगे बड़े से बड़े ख़लीफ़ा की बात की भी कोई हैसियत नहीं है।
यही वह बेटी है जिसकी मोहब्बत और मां जैसी शफ़क़त को देख कर दुनिया की सबसे अज़ीम मख़लूक़ यानी पैग़म्बर स.अ. यह फ़रमाते नज़र आए कि फ़ातिमा (स.अ.) अपने बाप की मां है, यही वह बेटी है जब वह आपके पास तशरीफ़ लातीं तो आप उनके सम्मान में खड़े हो जाते थे।
यही वह बेटी है जिसकी अल्लाह की इताअत के जज़्बे का यह हाल है कि जब आपकी शादी इमाम अली अ.स. से हुई तो पैग़म्बर स.अ. के सवाल के जवाब में इमाम अली अ.स. ने फ़रमाया मैंने फ़ातिमा (स.अ.) को अल्लाह की इबादत में अपना मददगार पाया।
यही वह बेटी है जिसने इस्लाम की कश्ती को भंवर से बचाने और इंसानियत को क़यामत तक के लिए दरिंदगी और यज़ीदियत से बचाने के लिए हसन (अ.स.) और हुसैन (अ.स.) जैसे बेटे दिए।
यही वह बेटी है जिसने सारी उम्र कायनात के अमीर की बीवी होते हुए भी किसी एक चीज़ की भी फ़रमाइश नहीं की। (हमारी बहनों और माओं के लिए सोचने का मक़ाम है)
यही वह बेटी है जिसने घर की कनीज़ की ऐसी तरबियत की कि वह आम बातों को जवाब भी क़ुर्आन की आयतों में देती थीं।
जिस बेटी ने दुनिया की सोंच बदली हो....
जिस बेटी ने दुनिया के सारे मां बाप को बेटी होने पर गर्व महसूस कराया हो....
जिस बेटी ने अपने बाप की मां होने का शरफ़ पाया हो.....
जिस बेटी ने बेटी, बीवी और मां हर किरदार को दुनिया के सामने इस तरह पेश किया कि अल्लाह ने क़यामत तक के लिए सारी दुनिया की औरतों के लिए आइडियल क़रार दे दिया हो....
जिस बेटी को जन्नत की सारी औरतों की शहज़ादी होने का ख़िताब मिला हो....
मुसलमानों इंसाफ़ से बताओ उस बेटी का हक़ क्या होना चाहिए........
लेकिन कुछ हुकूमत और दुनिया के लालची लोगों ने उसी बेटी को उसके हक़ से महरूम कर दिया.....
उसी बेटी जिसकी सच्चाई और पाकीज़गी पर क़ुर्आन गवाह था उससे गवाह मांगे गए......
उसी बेटी जिसके बाप उसके सम्मान और एहतेराम में खड़े हो जाते थे और अपनी जगह उसे बिठाते थे उसी बेटी को भरे दरबार में खड़ा रखा गया.......
उसी बेटी को उसके बाप के ग़म में रोने से रोक दिया गया.....
उसी बेटी के दरवाज़े पर कुछ दुनिया परस्त और हैवानी सिफ़त वाले लोग आग ले कर घर जलाने जमा हो गए.....
उसी बेटी को ग़ुस्ल देते समय दुनिया के सबसे बड़े साबिर भी अपने सब्र के बांध को टूटने से रोक नहीं सके.....
उसी बेटी जिसकी विलादत पर सारी दुनिया रौशन हो गई थी उसको यह वसीयत करनी पड़ी कि ऐ अबुल हसन मुझे रात के अंधेरे में दफ़्न करना.....
उसी बेटी जिसकी विलादत की बरकत से अरब की बेटियों को ज़िंदा दफ़्न कर देने की रस्म ने दम तोड़ दिया था उसी बेटी को दफ़्न करने के बाद उसकी क़ब्र के निशान को मिटाना पड़ा.....
उसी बेटी जिसकी विलादत के बाद पैग़म्बर स.अ. को अबतर का ताना देने वाले हमेशा के लिए अबतर हो गए वह केवल 18 साल की उम्र में इस दुनिया से चली गई......
उसी बेटी जिसकी अज़मत के आगे दुनिया के सबसे कामिल यानी इमामों ने भी अदब का इज़हार किया है आज तक उसकी क़ब्र बिना सायबान के है......



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यह 20 अरब डॉलर नहीं शीयत को नाबूद करने की साज़िश की कड़ी है पैग़म्बर स.अ. की सीरत और इमाम ख़ुमैनी र.अ. की विचारधारा शिम्र मर गया तो क्या हुआ, नस्लें तो आज भी बाक़ी है!! इमाम ख़ुमैनी र.ह. और इस्लामी इंक़ेलाब की लोकतांत्रिक जड़ें हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के घर में आग लगाने वाले कौन थे? अहले सुन्नत की किताबों से एक बेटी ऐसी भी.... फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी स्थापित कर भारतीय छात्रों को गुमराह कर रही है अमेरिकी सरकार । वह एक मां थी... क़ुर्आन को ज़हर बता मस्जिदें बंद कराने का दम भरने वाले डच नेता ने अपनाया इस्लाम । तुर्की के सहयोग से इदलिब पहुँच रहे हैं हज़ारो आतंकी । आयतुल्लाह सीस्तानी की दो टूक , इराक की धरती को किसी भी देश के खिलाफ प्रयोग नहीं होने देंगे । ईरान विरोधी किसी भी सिस्टम का हिस्सा नहीं बनेंगे : इराक सीरिया की शांति और स्थायित्व ईरान का अहम् उद्देश्य, दमिश्क़ और तेहरान के संबंधों में और मज़बूती के इच्छुक : रूहानी आयतुल्लाह सीस्तानी से मुलाक़ात के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नजफ़ पहुंची इस्लामी इंक़ेलाब की सुरक्षा ज़रूरी , आंतरिक और बाह्र्री दुश्मन कर रहे हैं षड्यंत्र : आयतुल्लाह जन्नती