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Code : 197602
Date of publication : 11/2/2019 19:16
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शिम्र मर गया तो क्या हुआ, नस्लें तो आज भी बाक़ी है!!

अभी हाल ही में पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने ही में जो हादसा हुआ उसने हम सभी के दिल को हिला कर रख दिया है, कल जब इसी शहर में इज़्ज़त लूटी जा रही थी, क़त्लेआम हो रहा था, बच्चों को बेरहमी से मारा जा रहा था तब भी उनका जुर्म केवल पैग़म्बर स.अ. और उनके अहलेबैत अ.स. से मोहब्बत करना था जबकि इस मोहब्बत के लिए ख़ुद अल्लाह ने क़ुर्आन में हुक्म दिया है और पैग़म्बर स.अ. ने अपनी ज़िंदगी में इस बात की बेहद ताकीद की है, और आज भी यही सुन्नत जारी है, आप सोचिए जिस नबी स.अ. और उनकी पाकीज़ा आल अ.स. पर सलवात पढ़ने का हुक्म अल्लाह और उसके रसूल स.अ. ने दिया हो उसी सलवात की वजह से एक मां की गोद से उसके कमसिन बच्चे को छीन कर उसके गले को पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने में काट दिया गया....

विलायत पोर्टल : ज़ुल्म की भी अजीब दास्तान है मानो जैसे ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही, सबसे ज़्यादा अफ़सोस तब होता है जब यह ज़ुल्म का गंदा चरित्र और घिनौना चेहरा रखने वालों के नाम के साथ इस्लाम और मुसलमान होने का टैग लगा होता है, जबकि अब तो यूरोप से लेकर दुनिया के बाक़ी देशों की बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटियों के प्रोफ़ेसरों और विद्वानों ने न जाने कितने आर्टिकल्स लिखे हैं और बयान दिए हैं जिनमें इस्लाम के लाने वाले और फैलाने वालों को शांति के दूत और दुनिया में अमन क़ायम रखने की कोशिश करने वाले बताया है, और साथ ही इस्लाम की तालीमात में अमन शांति स्थापित करने और नैतिकता को बुनियादी तालीमात में से बयान किया है, उसके बावजूद न जाने यह कौन से कैसे और कहां से कुछ जाहिल और चरित्रहीन लोग आ जाते हैं जो कुछ ऐसे काम करते हैं जिसका इस्लाम तो क्या, इंसानियत से कोई रिश्ता नाता नहीं होता, यह ऐसे लोग होते हैं जो अपनी ज़ाती दुश्मनी, साम्राज्य के डर या दुनिया की हवस के कारण अपने घिनौने कारनामों और घटिया हरकतों को भी मज़हब का नाम दे देते हैं।
यह दरिंदगी कोई नई नहीं है, पैग़म्बर स.अ. की वफ़ात के बाद ही आपके शहर में आपकी बेटी के साथ जो हुआ उसको सोंच कर ही रूह कांप जाती है, अभी इन दिनों अय्यामे फ़ातमिय्यह स.अ. में आपने उलमा से सुना होगा..... और कर्बला में तो जो कुछ हुआ उससे सारी इंसानियत प्रभावित हुई ही लेकिन उसके बाद जो मदीने में यज़ीद ही की हुकूमत में शिम्र की नस्ल के हाथों जो अपराध हुआ उसे बयान करते हुए भी शर्म आती है, बस इतना समझ लीजिए कि इब्ने कसीर के मुताबिक़ मुस्लिम इब्ने अक़बह ने पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने को तीन दीन तक अपने लश्कर वालों के लिए मुबाह कर दिया था (तारीख़े कामिल इब्ने कसीर, जिल्द 4, पेज 117) यानी उसके फ़ौजी जो चाहें जिसके साथ जैसा चाहें सुलूक करें, जिसका माल चाहें ज़ब्त कर लें, जिसकी चाहें हत्या कर दें, जिसकी चाहें इज़्ज़त लूट लें।
केवल यही नहीं बल्कि इब्ने अबिल हदीद मोतज़ली लिखते हैं कि यज़ीद की फ़ौज ने पैग़म्बर स.अ. के शहर में अहलेबैत अ.स. के चाहने वालों को भेड़ बकरियों की तरह ज़िबह कर दिया, ज़मीन पर बहे हुए ख़ून का आलम यह था कि एक क़दम रखने की जगह नहीं थी, मोहाजेरीन, अनसार और जंगे बद्र में पैग़म्बर स.अ. के हुक्म पर अमल करने वालों को काट डाला गया और अगर बाद में कोई ज़िंदा बचा दिख गया तो उससे यज़ीद के ग़ुलामों की हैसियत से बैअत ली गई। (शरहे नहजुल बलाग़ा, इब्ने अबिल हदीद, जिल्द 3, पेज 952)
घिनौने चरित्र और दरिंगी का यह हाल था कि मुस्लिम इब्ने अक़बह ने पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने की औरतों को अपने फ़ौजियों के लिए जाएज़ ऐलान कर दिया था। (मोजमुल बुलदान, याक़ूत हम्वी, जिल्द 2, पेज 924)
सियूती ने भी हसन बसरी से नक़्ल करते हुए लिखा कि मदीने को लूटा गया और एक हज़ार कुंवारी लड़कियों के साथ ज़बर्दस्ती ज़ेना (रेप) किया गया। (तारीख़ुल ख़ुलफ़ा, पेज 233, सहीह मुस्लिम, किताबुल हज, बाबो फ़ज़्लिल मदीना, हदीस 10, 16, मुसनद अहमद इब्ने हंबल, जिल्द 4, पेज 55, कंज़ुल उम्माल, जिल्द 12, पेज 246, 247)
केवल यही नहीं इब्ने क़ुतैबा ने तो यह भी लिखा है कि यज़ीद के दरिंदों के इस घिनौने अपराध और अज़ीम गुनाह के नतीजे में जो पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीना में बहुत सारे बच्चे पैदा हुए जिनके बाप का पता ही नहीं था। (अल-इमामह वस सियासह. जिल्द 2, पेज 15)
अब शायद दुनिया वालों के साथ साथ उन भोले भाले मुसलमान जो आज भी दाएश के कामों के समर्थन में मुंह खोला करते हैं उनके भी समझ में आ जाए कि यह दाएश ने इराक़ में जेहादुन निकाह नहीं क़ायम किया था बल्कि यज़ीद की सुन्नत क़ायम की थी, और उसे इस्लाम का हुक्म बताया था, जबकि कौन सा इंसान ऐसे घिनौने काम को क़ुबूल करेगा जो इसे मज़हब का नाम दिया जाए।
एक और ज़ुल्म जो इसी हर्रा नामी दास्तान में पेश आया था वह यह कि जब यज़ीद की फ़ौज कई दिनों तक पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने को लूट चुकी तो उसके बाद घर घर जा कर चेक करना शुरू किया कि कहीं कोई बच न गया हो, देखते देखते एक सिपाही एक घर में गया और माल व दौलत के बारे में पूछा, घर में मौजूद औरत ने कहा, जो कुछ था वह तुम्हारे सिपाही लूट ले गए, यज़ीदी सिपाही ने देखा उसकी गोद में उसका दूध पीता हुआ बच्चा है, जब उस ज़ालिम सिपाही को कुछ नहीं मिला तो उसने उस नन्हे शीरख़ार बच्चे को पैर पकड़ कर मां की गोद से छीन कर ऐसा दीवार पर मारा कि उसका भेजा सर से निकल कर ज़मीन पर आ गिरा। (अल-इमामह वस सियासह, जिल्द 1, पेज 832)
अभी हाल ही में पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने ही में जो हादसा हुआ उसने हम सभी के दिल को हिला कर रख दिया है, कल जब इसी शहर में इज़्ज़त लूटी जा रही थी, क़त्लेआम हो रहा था, बच्चों को बेरहमी से मारा जा रहा था तब भी उनका जुर्म केवल पैग़म्बर स.अ. और उनके अहलेबैत अ.स. से मोहब्बत करना था जबकि इस मोहब्बत के लिए ख़ुद अल्लाह ने क़ुर्आन में हुक्म दिया है और पैग़म्बर स.अ. ने अपनी ज़िंदगी में इस बात की बेहद ताकीद की है, और आज भी यही सुन्नत जारी है, आप सोचिए जिस नबी स.अ. और उनकी पाकीज़ा आल अ.स. पर सलवात पढ़ने का हुक्म अल्लाह और उसके रसूल स.अ. ने दिया हो उसी सलवात की वजह से एक मां की गोद से उसके कमसिन बच्चे को छीन कर उसके गले को पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने में काट दिया गया....
6 या 7 साल का बताया जाने वाला यह बच्चा अपनी मां के साथ टैक्सी में कहीं जा रहा था, उसकी मां द्वारा सलवात पढ़े जाने या कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार किसी दूसरे तरीक़े से जैसे ही उसको पता चला कि यह महिला अहलेबैत अ.स. की चाहने वाली है रास्ते में गाड़ी रोक कर एक दुकान या किसी जगह पर लगे हुए शीशे को तोड़ कर उसके द्वारा उस बच्चे का गला रेत कर उसकी हत्या कर दी, मां, पास में मौजूद लोगों से गुहार लगाती रही, चीख़ती रही, चिल्लाती रही लेकिन किसी एक ने उसकी फ़रियाद नहीं सुनी.... और उसकी आंखों के सामने ही उसकी गोद के पाले ने दम तोड़ दिया....
या रसूल्लाह (स.अ.) फ़रियाद है फ़रियाद.....
सबसे दुख की बात तो यह है कि आले सऊद और वहां मौजूद काबे और मदीनतुर रसूल के ठेकेदारों ने न केवल इस मुद्दे पर अभी तक ज़ुबान नहीं खोली बल्कि वहां के कुछ चैनल और रिपोर्टर अब यह साबित करने पर लगे हैं कि उस मासूम बच्चे ज़करिया अल-जाबिर का हत्यारा मानसिक रूप से बीमार था, उसका पूरा इलाज होने से पहले उसे छोड़ दिया गया था.....
ध्यान रहे यह कोई पहले मौक़ा नहीं है जब सऊदी में इस तरह का कोई हादसा हुआ हो और वहां की हुकूमत ने बजाए उस घटना की निंदा करने के उसको मानसिक या कोई और रोगी घोषित कर दिया हो, अभी कुछ समय पहले मदीने ही में एक 18 साल के जवान लड़के की हत्या हुई थी जिसके बाद काफ़ी सनसनी फैल गई थी लेकिन आले सऊद के सरकारी चमचों ने आकर घटना पर कंट्रोल किया और उसके बाद यही हुआ कि हत्यारे को मानसिक रोगी घोषित कर के इलाज के बहाने अस्पताल भेज दिया गया।
नतीजा साफ़ है शिम्र मर के जहन्नम चला गया तो क्या हुआ उसकी नस्ल तो आज ज़िंदा है....


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